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मेरी कॉम से प्रभावित होकर नुसरत ने शुरू की मुक्केबाजी, छह महीने में ही हासिल कर लिए कई पदक

मेरठ: शिक्षा के अलावा खेल के क्षेत्र में भी अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन करके लड़कियां खुद को लड़कों से कम नहीं होने का सबूत पेश कर रही हैं। क्रिकेट, हॉकी, फुटबॉल बैडमिंटन और टेनिस जैसे खेलों के अलावा अल्का तोमर, मेरी कॉम, साक्षी और गीता फोगाट ने खुद को इन खेलों में भी साबित किया है जिनकी पहचान पुरुषों के नाम से हुआ करती थी।

न्यूज़ नेटवर्क समूह प्रदेश 18 के अनुसार मेरठ की ऐसी ही एक लड़की नुसरत ने मेरी कॉम से प्रभावित होकर मुक्केबाजी जैसे कठिन खेल का न केवल चुना बल्कि पिछले छह महीने में खुद को साबित करके एक मिसाल भी पेश की है। कम समय में ही जिला और राज्य स्तर पर सफलता हासिल करने वाली नुसरत के लिए अब आसमाँ और भी हैं।

वर्तमान में नुसरत की इच्छा वैश्विक प्रतियोगिताओं के लिए खुद को तैयार कर देश के लिए स्वर्ण पदक हासिल करना है। शहर के एक पिछड़े इलाके से संबंध रखने वाली नुसरत फातिमा के जीवन में कुछ समय पहले तक स्पोर्ट्स का कोई खास महत्व नहीं था, लेकिन विश्व चैंपियन मेरी कॉम के जीवन पर बनी फिल्म ने नुसरत का जीवन भी बदल दी।

मेरी कॉम को देखकर पिछले छह महीने पहले ही मुक्केबाजी के लिए कोचिंग की शुरूआत करने वाली नुसरत ने कुछ महीनों में ही न केवल राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं में खुद को साबित करते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया, बल्कि जिले की बेस्ट बॉक्सर का खिताब भी हासिल क्या है। शिक्षा के साथ स्पोर्ट्स मुक्केबाजी की शुरुआत करके भविष्य के लिए नुसरत ने अपने इरादे जाहिर कर दिए हैं। नुसरत मेरठ के सनातन धर्म गर्ल्स इंटर कॉलेज में इंटर की छात्रा हैं। अध्ययन के साथ स्पोर्ट्स में अपना कैरियर बनाने के लिए नुसरत कड़ी मेहनत कर रही हैं।

जिले के कैलाश प्रकाश स्टेडियम में नुसरत को मुक्केबाजी प्रशिक्षण देने वाले कोच का कहना है कि छह महीने के कम समय में नुसरत ने जिस तरह अपनी लगन और मेहनत से खुद को साबित किया है, ऐसा जुनून चैंपियन में ही नजर आता है। किसी भी क्षेत्र में बच्चों की सफलता के लिए घर और समाज का सहयोग बेहद जरूरी है। नुसरत के सपने को हकीकत में बदलने के लिए जहां एक ओर नुसरत घरवालों की इच्छा शामिल है, तो वहीं नुसरत को स्कूल से भी भरपूर प्रोत्साहन और सहयोग मिल रहा है।

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