Why RBI Governor Urjit Patel resigns ? Know

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भारतीय  रिज़र्व  बैंक के गवर्नर  उर्जित पटेल ने  अपने पद से इस्तीफा दे  दिया, RBI  गवर्नर का Sep 2019 में कार्यकाल सम्पात होना था ,

भारतीय  रिज़र्व  बैंक के गवर्नर  उर्जित पटेल  ने अपने इस्तीफ़े की वजह निजी बताई है, लेकिन कहा जा रहा है कि रिज़र्व बैंक की स्वायत्ता, कैश फ्लो और ब्याज दरों में कमी नहीं करने को लेकर उनका सरकार के साथ टकराव था.

रिज़र्व बैंक और मोदी सरकार के बीच तनातनी पहली बार तब उभर कर सामने आई थी जब डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने 26 अक्टूबर को एक कार्यक्रम में रिज़र्व बैंक की स्वायत्तता की वक़ालत की थी. विरल आचार्य ने मुंबई में देश के बड़े उद्योगपतियों के एक इवेंट में कहा था, ‘केंद्रीय बैंक की आज़ादी को कमज़ोर करना त्रासदी जैसा हो सकता है. जो सरकार केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता की अनदेखी करती हैं, उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है.’

कुछ दिन पहले ही उर्जित पटेल ने बैंकों में धोखाधड़ी पर गहरा दुख जताते हुए कहा था कि केंद्रीय बैंक नीलकंठ की तरह विषपान करेगा और अपने ऊपर फेंके जा रहे पत्थरों का सामना करेगा, लेकिन हर बार पहले से बेहतर होने की उम्मीद के साथ आगे बढ़ेगा.

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आरोप लगाया था कि रिज़र्व बैंक ने कर्ज़ बांटने के काम में लापरवाही बरती. साथ ही पीएनबी घोटाले में भी सरकार ने आरबीआई को कठघरे में खड़ा किया था. सरकार का आरोप था कि आरबीआई की ढिलाई के कारण एनपीए की समस्या बढ़ी.

केन्द्र सरकार और आरबीआई के बीच एक और विवाद का विषय बना आरबीआई एक्ट का सेक्शन 7. इस सेक्शन के तहत केन्द्र सरकार जनहित में अहम मुद्दों पर आरबीआई को निर्देश दे सकती है. हालांकि केन्द्र सरकार ने कहा था कि उसने इस सेक्शन का इस्तेमाल नहीं किया है.

बैंकिंग सेक्टर में सुधार के लिए आरबीआई ने इस साल की शुरुआत में कई कड़े नियम बनाए थे. इसके लिए ग़ैर बैंकिंग फ़ाइनेंशियल कंपनियों पर कई तरह की पाबंदियां लगाई गई थी. सरकार को आशंका थी कि इस तरह की सख्ती से छोटे और मझोले उद्योगों को कर्ज़ मिलने में दिक्कत हो सकती है.

करेंसी और बॉन्ड मार्केट पर भी पड़ना तय माना जा रहा है. करेंसी एक्सपर्ट सौम्य दत्ता कहते हैं, “आरबीआई की कोशिशों के बाद रुपया डॉलर के मुकाबले संभल पाया था, लेकिन अब इस कदम से करेंसी और बॉन्ड मार्केट पर दबाव आएगा. ब्रेक्सिट के कारण भी डॉलर मजबूत होता जा रहा है और ऊपर से भारत में जो घटनाक्रम हो रहे हैं, उससे अगले एक महीने में डॉलर के मुकाबले रुपया फिर 72 से साढ़े 72 रुपये तक के स्तर पर पहुँच सकता है.”

फ़िच ने इस साल भारत का जीडीपी ग्रोथ अनुमान घटाकर 7.2 फ़ीसदी कर दिया है, जबकि सितंबर में ही इसी एजेंसी ने अनुमान लगाया था कि इस वित्त वर्ष में भारत की जीडीपी ग्रोथ 7.8 फ़ीसदी रहेगी. क्रिसिल ने भी जीडीपी ग्रोथ अनुमान 7.5 फ़ीसदी से घटाकर 7.4 फ़ीसदी कर दिया है.